उम्मीद की किरण: अपूर्वा फाउंडेशन की कहानी" टोहाना की शांत गलियों में, जहाँ उम्मीद और संघर्ष एक-दूसरे का हाथ थामे चलते हैं, वहीं एक नाम है जो नन्हीं मुस्कानों में उजाला भर रहा है – अपूर्वा फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट। यह फाउंडेशन उन लोगों के लिए एक आशा का प्रतीक बनकर उभरा है, जो जीवन की कठिनाइयों और अंधकारमयी परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ दान देना नहीं, बल्कि समाज के हर हिस्से को एक नया दिशा दिखाना है। अपूर्वा फाउंडेशन का मिशन है कि हम हर व्यक्ति को उनकी ज़रूरतों के अनुसार मदद प्रदान करें और उनकी जिंदगी में बदलाव लाएं। हमारे प्रयास केवल एक वक्त का भोजन या कपड़ा मुहैया कराना नहीं है, बल्कि यह एक लंबी यात्रा है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, और बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में निरंतर चल रही है। हमारा फोकस उन बच्चों पर है जिनके पास संसाधनों की कमी है, हम उन्हें शिक्षा के अवसर प्रदान करते हैं ताकि वे समाज में अपनी पहचान बना सकें। साथ ही, हम स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने और जरूरतमंदों तक आवश्यक इलाज पहुँचाने में भी सक्रिय हैं
अपूर्वा फाउंडेशन समाज के वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुँचाने हेतु कार्य करता है।
मोबाइल हेल्थ कैंप, निःशुल्क दवा वितरण, रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से हम आमजन को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
हम विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
समय-समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण और परामर्श शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
हमारा उद्देश्य है यह सुनिश्चित करना कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।
आपातकालीन स्थिति, महामारी या प्राकृतिक आपदा के दौरान हम तुरंत राहत सामग्री और भोजन उपलब्ध कराते हैं।
नियमित रूप से झुग्गी बस्तियों और सड़कों पर रहने वाले लोगों के लिए फूड डोनेशन ड्राइव्स चलाए जाते हैं।
साथ ही हम बच्चों और वृद्धों के लिए पोषण योजना के अंतर्गत पौष्टिक आहार की व्यवस्था करते हैं।
शिक्षा ही समाज को बदलने की सबसे बड़ी शक्ति है, और इसी सोच के साथ हम बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, स्टेशनरी और स्कॉलरशिप प्रदान करते हैं।
ग्रामीण और शहरी गरीब क्षेत्रों में ट्यूशन सेंटर और डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
हम स्कूल ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने का कार्य करते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कैरियर गाइडेंस के लिए भी विशेष शिविर लगाए जाते हैं।
सामाजिक परिवर्तन के लिए जागरूकता सबसे आवश्यक है।
हम स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सुरक्षा, बाल अधिकार, और सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दों पर जनजागरूकता अभियान चलाते हैं।
नुक्कड़ नाटक, रैली, पोस्टर अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है।
स्कूलों, कॉलेजों और गाँवों में विशेष सत्र आयोजित कर नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग किया जाता है।
कक्षा 1 से लेकर स्नातकोत्तर तक के दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्तियां निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और स्कूल वाहन सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए दिव्यांग पेंशन यह सेवा उनके भावनात्मक और मानसिक विकास के लिए बेहद आवश्यक होती है।
निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण सहायक उपकरणों का वितरण (जैसे व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र आदि) — ADIP योजना के तहत पुनर्वास सेवाएं — जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्रों (DDRCs) द्वारा दिव्यांग बच्चों को उनके अनुकूल रोजगारपरक कौशल सिखाए जाते हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें
दिव्यांग बच्चों को सामान्य स्कूलों में पढ़ने का अवसर दिया जाता है। इसके लिए विशेष शिक्षक, शिक्षण सहायक सामग्री और संसाधन कक्ष (Resource Rooms) की सुविधा दी जाती है।
दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूलों, सार्वजनिक भवनों और परिवहन सेवाओं को व्हीलचेयर और अन्य आवश्यकताओं के अनुसार सुलभ बनाया जाता है। अगर आप किसी विशेष सेवा के बारे में अधिक जानकारी या योजनाओं की सूची चाहते हैं (जैसे कि केंद्र/राज्य सरकार की योजनाएं), तो बताइए — मैं विस्तार से जानकारी दे सकता हूँ। यह सेवा उनके भावनात्मक और मानसिक विकास के लिए बेहद आवश्यक होती है।
मानसिक मंदता, ऑटिज़्म, या अन्य बौद्धिक विकलांगता वाले बच्चों के लिए काउंसलिंग, व्यवहारिक थेरेपी और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। यह सेवा उनके भावनात्मक और मानसिक विकास के लिए बेहद आवश्यक होती है।उनके अधिकारों की जानकारी, कानूनी सहायता, और UDID कार्ड जैसी पहचान सुविधाएं भी दी जाती हैं। सांस्कृतिक, खेल, और डिजिटल तकनीक के माध्यम से उनके समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाता है।
ऐसे दिव्यांग बच्चों के लिए जो परिवार से दूर हैं या जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है, सरकार और एनजीओ विशेष हॉस्टल, विद्यालय और देखभाल केंद्र प्रदान करते हैं। दिव्यांग बच्चों को उनके अधिकार और सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए जिला अस्पतालों से प्रमाणपत्र और UDID कार्ड प्रदान किए जाते हैं।